सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित ऐतिहासिक विजयगढ़ किला एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार मामला किले में मौजूद एक तालाब के नाम और एक मजार की ऐतिहासिकता को लेकर गरमा गया है। किले में स्थित सरोवर को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक पक्ष इसे किरण सागर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह असल में मिरन सागर है, जो मिरन शाह से जुड़ा हुआ है।
आपको बता दें कि सोनभद्र जिले में चर्चित और तिलस्मी इतिहास समेटे विजयगढ़ किला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद किले में मौजूद एक तालाब के नाम और एक मजार की ऐतिहासिकता को लेकर खड़ा हुआ है। क्या यह किरण सागर है या मिरन सागर… और क्या किले में मौजूद मजार का कोई ऐतिहासिक आधार है?इन सवालों की जांच अब प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश के जिले में स्थित विजयगढ़ किला, जो कभी चंदेल राजाओं का गढ़ रहा…आज एक नए विवाद की वजह से चर्चा में है। घने जंगलों और ऊंची पहाड़ी पर बसे इस किले में मौजूद सरोवर के नाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। किले में दो प्रमुख सरोवर बताए जाते हैं। राम सागर और किरण सागर। लेकिन मुस्लिम पक्ष का दावा है कि किरण सागर ही असल में मिरन सागर है…जो मिरन शाह से जुड़ा हुआ है।
इसी विवाद को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष नंद लाल गुप्ता ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जांच की मांग की है। जिला अध्यक्ष द्वारा दिए गए पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि किले में मिरन शाह के नाम पर मजार बनाकर उर्स आयोजित किया जा रहा है…जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है।
वहीं, दूसरी ओर यह किला दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र भी बना हुआ है।जहां मुस्लिम समुदाय उर्स के दौरान बड़ी संख्या में जुटता है…तो वहीं सावन में कांवड़ यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालु यहां से जल लेने पहुंचते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। डीएम द्वारा चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। जो किले में मौजूद सरोवर और मजार के ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं की जांच करेगी। अब सभी की नजर इस जांच रिपोर्ट पर टिकी है। जो यह तय करेगी कि विजयगढ़ किले का यह विवाद इतिहास से जुड़ा है या आस्था से।

